श्री कृष्ण का जीवन एवं शिक्षाएँ, जैसा भक्ति परंपरा में श्रद्धापूर्वक माना जाता है, दर्शाती हैं कि भक्ति कोई बोझ नहीं बल्कि हृदय का आनंदमय समर्पण है।
वृंदावन की बाँसुरी से लेकर भगवद गीता के उपदेश तक, भक्तों को कृष्ण में एक मित्र, मार्गदर्शक एवं प्रियतम मिलते हैं।